वो मांगते हैं अपने हर उस पल का हिसाब
जो उन्होनें हमारे साथ बितायें
वो कहतें हैं उनका वो हर पल ज़ाया हो गया
जो उन्होने हमारे साथ बितायें
अब हम समझायें कैसे की हमारे पास कोई हिसाब नहीं
जिसमें हो बयान हर पल का हमारे पास ऐसी कोई किताब नहीं
मुहब्बत में भला वक्त की गिनती कैसी
जिसमें वक़्त की गिनती हो वो मुहब्बत कैसी
वो इतने मग़रुर अब हुये या फिर पहले से ही मग़रुर थें
तोड़ दिया हमारा ग़ुरूर उसी ने
जिसके इश्क़ में हम चकनाचूर थें
जो वक्त हमनें ज़ाया किया उनका हम उन्हें लौटा नहीं सकतें
बीच रस्तें में आकर वो कहते हैं हमसे, वो मुहब्बत हमारी निभा नहीं सकतें
ना मिली वजह हमें ना मिला ठिकाना कोई
जब इश्क़ में ना मिला हमें उनका सहारा कोई
इतने अकेले हैं हम कभी ये एहसास हुआ नहीं
अक्सर मुहब्बत में मिट जाती है हस्ती अपनी
उनपर मिटने से पहले ये सोचा नहीं
हम बढ़ते रहें आगे उनकी तलाश में
उन्हें हमारी मुहब्बत की भनक तक लगी नहीं
अब रहा ना कोई आशियाना हमारी मुहब्बत का
ऐसा छूटा उनका साथ की फिर कभी मिला नहीं



