Poetry
इन निगाहों को यूं फेर कर ,हम पर सितम ना कीजिये
हम तो बस एक दिवानें हैं, हम पर ये जुलूम ना कीजिये
इन निगाहों में हैं सांसे बसीं हमारी
तेरे दर पे आकर जि़न्दगी ये रुकी
मेरी जि़न्दगी यूं दुश्वार अब ना कीजिये
ओ हमनशी हम दिवाने हैं, हमें बेताब यूं ना कीजिये
हमनें जब भी पाया खुद को आप में ही पाया है
ये दिल भला आपके सिवा ठहर कहाँ पर पाया है
हमें तो कदर का इल्म ना था कभी
आपसे मिल कर ये दिल अपनी कदर कर पाया है
कभी रुसवा थी जि़न्दगी भी हमसे
पर अब जीने का दौर आया है
बस कर दो रहम, हमें दे दो वजह
ये दिवाना फरियाद लेकर आया है
मेरे हमनवां ये इल्तिजा है मेरी
ना हमें अब तरसाईये
इन निगाहों को यूं फेरकर ,अब हमें ना तरसाईये


