Poetry
वो कहते हैं हमसे, उन्हें यकीन नहीं मुहब्बत में
हम भी उन्हें समझा नहीं पातें, जि़न्दगी है बसती मुहब्बत में हमारी
वो कहतें हैं उनका इरादा नहीं दिल तोड़ने का हमारा
पर हम उन्हें समझायें कैसे की ऐसा कहकर वो हमपर क्या जुल्म करतें है
होगी ये मजा़क की बात नज़रों में उनकी
पर मुहब्बत सा संजिदा मसला क्या होगा
वो करलें अगर कदर हमारी मुहब्बत की, इससे बेशकिमती तोहफा क्या होगा
हम खुद को हार गयें जिस मुहब्बत में
वो अगर इस मुहब्बत को झुठला दें
भला इससे बडा़ मुहब्बत में कौन सा ग़म होगा


