तेरे इश्क़ में हर हद से गुज़र जाऊं यारा

Law life aur multigyan
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Poetry 



तेरे इश्क़ में हर हद से गुज़र जाऊं यारा 

होना तेरा दूर नहीं मुझको गंवारा 

तू कह दे तो खुद को भी पीछे छोड़ दूँ में 

लाऊं तेरे लिए जन्नत का कोई सितारा  

वादे तो करतें हैं सब मुहब्बत में 

मुझे तो मुहब्बत को ही जीना है 

मैं रह जाऊं कहीं तेरे पास में

तेरे दिल में मुझको रहना है 

 झूठा होगा ये ज़माना पर मेरी मुहब्बत सच्ची है 

तेरी इश्क़ की जो आदत डाली वो आदत मेरी अच्छी है 

तेरे बिन ना मुझे जीना गंवारा 

सच कहूँ बिन तेरे ना कभी होगा गुज़ारा 



हमें आदत नहीं तेरे बगैर रहनें की 

जो दिल में है मेरे,अब ज़रूरत है उसे कहनें की

हमें बेगानों से क्या लेना है 

बस संग में तेरे चलना है 

अब ये दिल बेचैन है तेरी मर्ज़ी सुनने को 

ना मजबूर करो खुद को चुप रहनें को 

तेरा चुप रहना भी सितम है हमारे लिए 

भले ये एक अदा हो तुम्हारे लिए 

तुम्हें ज़रुरत नहीं ज़माने की फिकर करनें की 

अब ज़रुरत है तेरे दिल की बात सुनने की 


तेरी यादों की जो पनाह मिली 

बरसों बाद जीने की राह मिली 

कब तक जीते आखिर जीतें हम बेवजह होकर 

थक जाते हम अकेले चल कर 

तेरे होने से राहों के कटने की वजह मिली 

बरसों बाद हमें जीने की वजह मिली 

तन्हाई का आलम घटता ही नहीं 

तेरे बिना ये वक़्त भी कटता नहीं 

तेरे आने से जीने की उम्मीद मिली 

तू पास है तो ज़िन्दगी की वजह मिली 



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