Poetry
जीत तुमसे है मेरी हारनें ना देना तुम
है नहीं मुहब्बत तुमसे ऐसा कभी ना कहना तुम
ये ज़माना होगा हैरान, हमारी मुहब्बत ऐसी होगी
हम एक दूजे से करेंगे मुहब्बत ऐसी जो किसी ने ना सुनी होगी
हम ना करेंगे तेरा क़सूर कोई
तुम भी हमें दग़ा देना नहीं
है मुहब्बत सच्ची तुमसे हमें, झूठी इसे तुम कहना नहीं
हमें फिकर नहीं है ज़माना जो भी कहे
बस इल्तिजा है तुझसे तू मेरे साथ रहे
इश्क़ की राहों में बस साथ मेरे चलना तुम
जीत मेरी है तुमसे हारनें ना देना तुम
हमनें ख़ता की और मुहब्बत का क़सूर कर गयें
ना जाना था जिस राह पर उस राह पर हम चले गयें
अब भला शिकायत क्या हो
किससे हम शिकवा करें
बिन सोचे समझे इश्क़ की राह में हम इतना आगे बढ़ गयें
हम बेपरवाह से थें और बेख़बर थे इश्क़ के आंजाम से
ना जानें क्यों हद आगे गुज़र गयें
हम ना जान पायें क्यों खुद को इश्क़ मार गयें
हम इश्क़ के हाथों हार गयें



