मेरे लिए तो तुम अपनें रहे हमेशा

Law life aur multigyan
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Poetry 



मेरे लिए तो तुम अपनें रहे हमेशा 

पर तेरे हम हो पाये नहीं  

दिल ने कहा बहुत कुछ तुमसे 

लेकिन कभी तुम सुन पाये नहीं 

दिल कहता रहा बेज़बान हो गया 

तुम दिल की ज़ुबां समझ पाये ही नहीं 

शायद मुहब्बत का यही दस्तूर है 

जिससे चाहत हो वो हर पल दूर है 

हमनें चाहा तुम्हें अपनी मुहब्बत को समझाना 

पर तुम मेरी मुहब्बत समझ पाये ही नहीं 



अगर ये आज़माइश है, हम इसे क़बूल करतें हैं

हम कर लेंगे साबित ये कि ,हम कितनी मुहब्बत करतें हैं

तुम मरते होगे किसी और पर 

पर जबसे जाना है मुहब्बत को हमनें तबसे हम बस तुमपे मरतें हैं 

ये पल भर का कोई खेल नहीं 

अपनी ज़िन्दगी हमनें मुहब्बत को अदा की है 

बदले में वक़्त से हमनें मुहब्बत की नवाज़िश ली है 


होंगे कई जो तुमसे मुहब्बत का दावा करतें हैं

पर हम तो तेरी मुहब्बत को ही जीते हैं 

होगा मुश्किल तुम्हारे लिये समझ पाना 

पर हम भी समझा नहीं सकते की हम तुझपे किस कदर मरतें हैं 



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