Poetry
बेचैन से हम, बेताब तुम,रहते हैं हम तुम खोये हुये
आजा लिपट के बस रो लें तुम और हम
एक अर्सा बीता इन आँखों को भीगोयें हुये
इश्क़ अपनी इबादत में आसूंओ को भी मंज़ूरी देता है
ये दिल तो अक्सर मुहब्बत में रोता है
कब रहोगे दूर हमसे, कब तक खुद को मारते रहोगे
आजाओ ना जी लें हम मुहब्बत का एक पल मरते हुये
तुम ही हो इबादत में और तुम ही रहोगे
चाहे तुम हमसे दूर जाने को भी कहोगे
चलों ना जी लेतें हैं इश्क़ के कुछ हसीन पल
एक अर्सा बीत गया तुझसे दूर रहते हुये
सारी ज़िन्दगी हम मुहब्बत के लिए तरसें हैं
हमें और अपनी मुहब्बत के लिए तड़पाओ ना
दिल लिख डाली हैं उम्मीदें कयी नाम तेरे
इस दिल को और तरसाओ ना
हम तो पहले से ही मिटे हुये हैं
हमें और मिटानें की ज़रुरत क्या है
तुम्हें भी है मुहब्बत हमसें
फिर मुहब्बत से इंनकार की ज़रुरत क्या है
चलें हैं हम सालों अकेले अब हमेंऔर अकेला करना ना
हम बड़ी चाहत लेकर आयें हैं तुम्हारी गलीयों में,
हमारी चाहत को ठुकराना ना
ना रहा अब हमारा ठीकाना कोई
हमें तुम अपने दिल में पनाह दोगे क्या
हम आयें हैं इस दुनिया से हार कर
हमें तुम मुहब्बत में जीत दोगे क्या
है कदर कहाँ इस ज़मानें को मुहब्बत की
कौड़ीयों के दाम यहाँ बिकती है मुहब्बत
हम लायें हैं अपनी मुहब्बत इस ज़मानें से छिपा कर
हमें तुम हमारी मुहब्बत का सही मोल दोगे क्या
रह गयी है मुहब्बत हमारी अंजाम के बिना
तुम हमारी मुहब्बत को नया अंजाम दोगे क्या



