दिल के कागज़ के हर हिस्से पर

Law life aur multigyan
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Poetry 


 दिल के कागज़ के हर हिस्से पर मैनें उसका नाम लिखा 

वो करता रहा नादानी मेरे साथ 

मैनें उसकी नादानी को उसकी मुहब्बत लिखा 

गलत था मेरा हर बार उसको सही समझना 

 मेरी मुहब्बत को उसने गँवारा ही समझा 

ना थी कदर उसे, ना फिकर थी मेरी 

मुझे वक़्त काटने का बहाना ही समझा 

 मेर समझता रहा उसे अपनी धड़कन 

पर उसनें मुझे कभी अपना भी ना समझा 



कभी  हमारी कदर ना करनें वाले 

पल भर के लिए हमारी कदर तो किया कर 

हम तो जीतें हैं तेरी मुहब्बत में 

तू भी तो कभी हमारी मुहब्बत में जीया कर 

हमें शौक नहीं यूं किसी की महफ़िल का हिस्सा बन जाने का 

पर तेरी लिए हमारी मुहब्बत हमें तेरी महफिल की ओर ले आयी है 

किसी और राह पर अब जाने का दिल करता नहीं 

तू मेरी ना सही, मेरे दिल की उम्मीद की कदर किया कर 

पहले थी आदत खुद को सम्भाल लेने की 

अब खुद को हम सम्भाल पातें नहीं 

किसी पल जो मिल जाये तूझे फुर्सत तो हमें भी सम्भाल लिया कर 

  


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