Poetry
वो लफ्ज़ जो बिन कहे रह गयें,ख्वाब जो अधूरे रह गयें
रह गयीं बातें जो अधूरी मुहब्बत की
ना पा सकें वजह हम तेरी नाराज़गी की
मुहब्बत के सारे अरमान अधूरे रह गयें
हम बयां करें किससे अपनें दिल के हालात
सारे मुहब्बत के वादे अधूरे रह गयें
गुज़र गया वो हर पल जो मुहब्बत से भरा था
नहीं मालूम उनका, पर हमारा दिल तो बस उनकी मुहब्बत से भरा था
एक दौर ये भी है जिसमें हमारी मुहब्बत गुमनाम है
मुहब्बत की दुनिया में मशहूर होकर फिर भी हम अंजान है
जो किस्से हमनें मुहब्बत के गढे़ थें वो बिन कहे कहीं गुम हो गयें
वो तो आज भी हैं मशहूर पर हम गुमनाम हो गयें


