Poetry
इन नज़रों में तू यूं बस गया
किसी और का इनमें बसेरा क्या होगा
जिस सुबह तेरी झलक ना मिले
भला वो सवेरा क्या होगा
होगा जो देख लेंगें, बस एक साथ तेरा जो साथ होगा
जो मिल ना सके रस्ते में साथ तेरा वो रस्ता भला क्या होगा
कटने को तो कट ही जायेगी है उम्र तमाम
पर जिस उम्र में उम्र भर तेरा सहारा होगा
ना पूछ अगर कभी पलटे वक्त के पन्नें ,फिर उस उम्र का नजा़रा क्या होगा
इन नज़रों के हर नजा़रों में एक बस तेरा बसेरा होगा
ना पूछ उन नजा़रों का मतलब मेरे लिये क्या होगा


