हम किन लफ्ज़ों में बतायें तुम्हें

Law life aur multigyan
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Poetry


 हम किन लफ्ज़ों में बतायें तुम्हें 

हम चाह कर भी कह पातें नहीं

रहते हो दूर तुम हमसे, पर हम दूर रह पातें नहीं 

किन लफ्ज़ों में बतायें अपने दिल का हाल

कैसे एक पल भी हमसे कट पाता है 

बान तेरे ये दिल भी धड़कनें से कतराता है 

सब कुछ अब तेरी मर्ज़ी से जुड़ा है 

ये दिल तुझसे मुहब्बत करनें पे अड़ा है 

एक पल का कोई हिस्सा भी हमसे बिन तेरे कटता नहीं 

पर कैसे कहें हम तुमसे, कुछ हम कह पाते नहीं 



अपनें दिल हाल क्या कहें हम ,कैसा जीता है ये 

तेरे ग़म हर पल रो कर खुद ही मरता है ये 

हमें कहा था कुछ लोगों ने, ना जाना मुहब्बत की राहों पर 

चाहें जिस भी हाल में जाओगे, लौट के आओगे बस हार कर 

कहना उनका सब सच हो गया 

आकर मुहब्बत की राहों में ये दिल टूट गया 

शायद अकेले खुश थें हम 

टूटे दिल के दर्द से अंजान थें हम

अब हर पल तेरी यादों में रोता है ये 

ना पूछ की तेरे बिना कैसे धड़कता है ये 



 

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