हमनें इश्क़ में हर हद पार की

Law life aur multigyan
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Poetry 



हमनें इश्क़ में हर हद पार की 

पर उनका तो इश्क़ से ही इंकार था 

ना हो सकें हम उनके, 

बस यहीं तक उनका साथ था 

वो भूल कर हमें आगे बढ़ गये 

पर हमारा आगे बढ़ना तो दूर ,हम  उन्हें भूल तक ना पायें 

साथ जन्मों चलनें का वादा था 

पर वो कुछ दूर तक भी ना साथ चल पायें 

उनका ये रवैया हमें तोड़ गया किस हद तक 

वो रहें हमारे आस पास, पर ना पहुंच सकें हमारे दर्द तक 

हमनें तो जान की भी बाज़ी लगा दी मुहब्बत में 

पर वो दिल भी ना उधार दे सकें मुहब्बत में 

हमारा दिल उनकी मुहब्बत का हक़दार था 

पर रह गया नाकाम,क्यों ऐसा हमारा प्यार था 



वो हर पल करतें हैं साज़िश हमसे दूर जानें की 

पर हमारी कोशिश होती है मुहब्बत निभाने की 

क्या करें कोई साज़िश मुहब्बत में 

ऐसा मुहब्बत में होता नहीं 

वो चाहतें नहीं हमें,कभी ज़ुबान से कहतें नहीं 

हमारी मुहब्बत में कोई कमी नहीं 

की है मुहब्बत बनाईं बन्दीशें नहीं 

 बस एक बार वो कह दे हम दूर हो जायेंगे 

ना होगी मर्ज़ी हम उसे नज़र ना आयेंगे 

हमनें मुहब्बत में उनकी बन्दगी की है 

की है मुहब्बत बनाईं बन्दीशें नहीं 



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