हमनें इश्क़ के ख्वाबों से ज़रा दूरी बना ली

Law life aur multigyan
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Poetry 



हमनें इश्क़ के ख्वाबों से ज़रा दूरी बना ली 

चलो हम लेते है ज़िन्दगी में तन्हाई

तुमने जब फेर लिया मुँह हमसे 

हम खाक जी पायेंगे 

हम मरते रहें तुझपर, अब बिन तेरे मर जायेंगे 

कर वादा मुहब्बत का तुम दूर हो गयें

ना जाने क्या पाकर तुम इतनें मग़रुर हो गये 

हम दुआ में रहा असर कोई 

पर हमनें इश्क़ में रखी कसर कोई 

फिर भी जब हासिल तेरा प्यार हुआ नहीं 

हमनें तेरी यादों संग दुनिया बसा ली 

तेरे इश्क़ के ख्वाबों से हमनें दूरी बना ली 



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तेरा सितम मुझे क़बूल है 

बस तू मेरी मुहब्बत क़बूल कर लेना 

मेरे दिल में तुम हो बस 

मुझे भी अपनें दिल में ज़रा सी जगह दे देना 

मुहब्बत में सितम हो जाना भी लाज़िमी है

तेरा हर सितम हम दिल से लगा कर रखेंगे 

तुम मेरी मुहब्बत को अपनें दिल में पनाह देना 

दिल में मेरे बस तेरी फ़रियाद है 

मेरी फ़रियाद तुम कबूल कर लेना 



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