Poetry
किसी और के जहां को रौशन किया
और हमें अंधेरों में झोंक दिया
थी मुहब्बत सच्ची हमारी
तुमनें भी मुहब्बत का नाता निभा दिया
हमनें ना दिन की गिनती की
ना रखा हिसाब रातों का
हर पल रहा तेरी इबादत का
तूने मेरे अच्छा तोहफ़ा दिया मेरी इबादत का
मेरी सांसों का चलना रोक दिया
छीनकर उजालों को अंधेरो में झोंक दिया
चलों तेरे ग़म को हम अब दिल से लगातें हैं
अब तेरी दुनिया से हम दूर जातें हैं
ना आयेंगे तेरी दहलीज़ पर कभी
अब तूझे इस बेगानी चाहत से आज़ाद करतें हैं
हम ना हो सकें कभी तेरे, इसका मलाल होगा
तुझसे दूर जाकर ये दिल बेहाल होगा
फिर भी मुहब्बत का ये ग़म हम उठातें हैं
तेरी दुनिया से हम अब दूर जातें हैं



