गुज़र गया वक़्त मुहब्बत का

Law life aur multigyan
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Poetry 

गुज़र गया वक़्त मुहब्बत का 

अब वो क्या लौट के आयेगा 

पर चाहा है जिसे शिद्दत से इस दिल ने 

उसके अलावा ये दिल किसी और पर ना आयेगा 

घूम लिया सारा जहां हमनें 

पर किसी और पर ये दिल आया नहीं 

ऐसा खोया ये उसकी यादों में 

के लौट के फिर मेरे पास भी आया नहीं 

वो चला गया अब दूर, ना अपनी यादें लेकर जायेगा 

इश्क़ का ये नाकाम सा मुक़ाम मेरी जान लेकर जायेगा 



अपनें हारने का ग़म नहीं ,तेरे जीत जाने की ख़ुशी है

तू दूर है आज मुझसे ये तेरी ही तो मर्ज़ी है 

 अकेले थें, रह लेंगे आगे भी अकेले हम 

बस दर्द तब होगा, जो होगा तू तन्हा कभी भी 

 तू अपनी तन्हाई में ही याद कर लेना हमें 

जो मर्ज़ी हो बुला लेना हमें 

तेरी महरबानी रही तूने हमें मुहब्बत से मिलाया 

तेरख इश्क़ हमें खुद से भी दूर ले आया 

मैनें कह दी अपने दिल की बात आगे तेरी मर्ज़ी है 

तू कर ले किसी पल में याद मुझे, बस इतने में ही मेरी ख़ुशी है 



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