किसी का असर हमपर क्या असर कर गया
दिल तो घायल था कबका, अब ये बेसबर हो गया
ना थी पहले खुद की भी फिकर
पर कोई आकर हमें अपनी फिकर दे गया
हम अकेले भलें थें या अब भले हैं
किसी के साथ कुछ वक़्त से हम भी चलें हैं
हम हो गयें बेपरवाह अब या पहले बेख़बर थें
पर ख़्याल है जितना हम ना इतनें बेसबर थें
किसी चाहत का सब्र हमें बेसबर कर गया
इस अंधेरी जिन्दगी में उजाला भर गया
अब चलनें की आदत नहीं, ठहरनें की तलब लगी है
जबसे हमें किसी की आदत लगी है
क्या करें कोई जो किसी की आदत खुद को ही बदल जाये
होश में भी मुहब्बत की बेहोशी नज़र आये
बदल गया है सब अब पहले जैसा सा कहाँ है
जिस दिल को रखा था सम्भाल के वो अब अपना कहाँ है
किसी के साथ ही लिपटा मेरी मुहब्बत का जहां है
हमे अब आती नहीं खुद से भी बहानों की अदा
ये दिल भी ना रह पाता है हो कर किसी से जुदा
इश्क़ में हमें अब आदत ही कुछ ऐसी लगी है
अब चलनें की आदत नहीं, ठहरनें की तलब लगी है



