हम हो गयें उसकी मुहब्बत में गुमनाम

Law life aur multigyan
0

Poetry 



हम हो गयें उसकी मुहब्बत में गुमनाम 

अब हमें अपना निशान भी मिलता नहीं 

हम ज़माना छोड़ आयें जिसके लिए 

अब साथ उसका मिलता नहीं 

ना है वो बेख़बर हमारे हलातों से 

ना अन्जान है मेरे मुहब्बत के इरादों से 

पर उसके इरादों को जान ना सकें हम 

उसका असकी चहरा ना पहचान सकें हम 

 खो गयी पहचान हमारी और मुहब्बत भी गुमनाम हो गयी 

जो कभी हमारी किस्मत हमसे रुठ गयी 

हम खुद को रहें ढूँढ पर खुद को ही हम मिलतें नहीं 

मिला इश्क़ में घाव ऐसा, किसी मरहम से भरता नहीं 


एक टिप्पणी भेजें

0टिप्पणियाँ

एक टिप्पणी भेजें (0)