Poetry
वो दरिया और मैं एक किनारा सा
बिन उसकी लहरों के मैं बेसहारा सा
वो लहर बनकर ज़िन्दगी को ख़्वाहिश दे जाता है
लगता नहीं दिल अगर वो दूर जाता है
वो आया तो लगा हर पल प्यारा सा
वो लगे जैसे खुदा का एक इशारा सा
उसकी आदत लगी कब खबर ना लगी
वो है तो लगे मुझ किनारे को भी किनारा सा
है वो एक दरिया और मैं एक किनारा सा
बिन उसके लगे ये दिल बेसहारा सा
कुछ देर और भी ठहर जाते
तुम दिल में आकर यूं ही बस जाते
तेरे बिना ना कोई ठिकाना है
तेरे बिन सबकुछ अंजाना है
तुम कहो ना क्या तुम्हारा कोई और ठिकाना है
तेरे बिन सबकुछ अंजाना है
काश तेरे साथ हम भी चल पातें
या तुमसे दूर होने से बेहतर हम मर जातें
बिन ना मेरा कोई ठिकाना है
एक तू ही जीने का बहाना है



