ना तेरा रहा मैं, ना हुआ किसी और का

Law life aur multigyan
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Poetry 


ना तेरा रहा मैं, ना हुआ किसी और का 

ये ज़िन्दगी रही नहीं, रहा बस एक धोखा 

तूने मुझे रोका नहीं, शायद किसी ने तूझे रोका होगा 

ये दिल भी रहा था बस भरोसे में तेरे 

पर तू ना रहा एक पल भी भरोसे मेरे 

ये खेल है दुनिया का बस मैं ही समझ पाया नहीं 

रहा तेरे इंतज़ार में तेरे इरादे समझ पाया नहीं 

कोई चाहे सिखना तो आके हमसे सीखे

मरतें रहतें हैं हर पल में हर बार हम ज़िंदा होके 

तेरी बेहतरी का ख़याल तूझे ज़्यादा है 

मेरी ज़रूरत समझ आती नहीं 

पर क्या करुं अपने दिल का, यहाँ से तेरी याद जाती नहीं 

तू मेरा ना रहा किसी और का सही 

मेरे हिस्से में बस तेरी यादें रहीं

तूनें जाकर दिल को तोड़ दिया 

अब ये किसी और का क्या होगा 

जिस कदर ये हुआ था तेरा अब क्या किसी का होगा 

ना रहने दिया खुद का, किसी और के क़ाबिल छोड़ा नहीं 

तू ना हुआ मेरा चल हो जा किसी और का 

पर ना तेरा हुआ मैं,ना हुआ किसी और का 



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