Poetry
ग़म इस बात का नहीं की तुम हमसे जुदा हुये
मलाल बस ये है की तुमसे दूर होकर भी हम ज़िंदा रहे
जो ख़्वाब रहे दिल में मुहब्बत के
वक्त ने सबको तोड़ दिया
चलते थें हम राहों में एक साथ
वक़्त ने हमारी राहों को मोड़ दिया
क्या खूब रहा किस्सा अपनी मुहब्बत का
फिर भी आलम बचा है बस दुरियों का
क्या कहें की इस पल में हम क्या खो कर आयें हैं
तेरे साथ मेरी जीने की वजह गयी, हम तो बस बेवजह ही आयें हैं
तूझे एहसास कहाँ मेरी चाहत का
इसलिए तू हर बार मेरा इम्तिहान लेता
तू कर लेता है पूरी मर्ज़ी अपनी
पर बदले में दर्द बड़ा देता है
तेरी मुहब्बत पर कभी हक जताया ना मैनें
बस गलती की मुहब्बत से पहले इजाज़त ली ना मैने
पर तुझको कहतें हैं तूझे हम सा कोई और ना मिलेगा
तब शायद हमारी याद में तेरा भी दिल जलेगा
कर लो ना तुम हमपर यक़ीन हमें तुमसे सच्ची मुहब्बत है
अगर कोई मिल गया भी गया तुम्हें, वो तुम्हें हमसी मुहब्बत ना करेगा



