Poetry
दिल तो कबका गिरवी हो चुका है तेरा
अब क्या हमारी जान लोगे तुम
ना रहा इरादा अब तुमसे अलग होने का
अब क्या हमसे अलग होने इरादा करोगे तुम
हम दिल तो कबका हार गयें तेरी चाहत में
पहचान भी अब हमारी आशिकों में शामिल है
अब क्या जा कर दूर हमसे हमारी पहचान लोगे तुम
अब हासिल कर लिया है हमनें मुहब्बत में एक हसीन मुकाम
अब क्या दूर जाकर हमसे हमारा मुकाम लोगे तुम
बेफिक्र होकर बस हम तुमसे मुहब्बत करतें हैं
अब क्या दूर जाकर हमसे,हमें ज़मानें की फ़िक्र दोगे तुम
हमारा हर कतरा अब तेरे हिस्से में आता है
अब क्या दूर जाकर हमसे हमी को छिनोगे तुम
दिल तो कबका गिरवी हो चुका है तेरा
अब क्या दूर जाकर हमारी जान लोगे तुम


