Poetry
तेरे लफ्ज़ कब मेरी ज़ुबां बन गये
हम पहले थे अलग या अब अलग बन गयें
पल दो पल की आज़माइश कर बैठे हम इश्क़ की
लो तेरे इश्क़ में हम दिवाने बन गयें
वक़्त की ख़बर है ना हालातों की परवाह
तेरे इश्क़ मे सजदा करके, बेपरवाह हम बन गयें
कहनें को इश्क़ दो हर्फ के खेल है
पर तेरे इश्क़ में पूरे ग़ुम हम हो गयें
क्या मालूम करें क्या ख़बर रखें, तेरे ऐहसासों से हमें फुर्सत कहाँ
है आदत लगी तेरे इश्क़ की ऐसी हमें
ज़माने के हर पहलू से रुख़सत हम हो गयें
ना होना था कभी आशिक़ हमें
पर तेरे इश्क़ में आशिकी के कायल हम हो गयें


