यूं खामोश से रह कर के

Law life aur multigyan
0
Poetry 


यूं खामोश से रह कर के 

इशारों में दिल का हाल बयां करना 

ज़रा तबीयत से कभी हमें भी बताना ये 

कैसे सीखा ऐसी मुहब्बत करना 

हम जो बोलकर भी कह पाते नहीं 

वो समझा जातें हैं अपने एक इशारे से 

पर हम समझा पाते नहीं बातों को ,अपने किसी शब्दों के सहारे से 





तुम साथ हो तो ग़म क्या करें 

हर मुश्किल लगती है आसान सी 

तुझसे हुयी पहचान ऐसी,के दुनिया लगती है अंजान सी 

 तू है तो लगे बेवजह भी वजह 

संग तेरे मेरा जहां आज़ाद है 

अब ना रही आदत अकेले चलने की 

हर पल एहसास तेरा साथ है 

ना होना अलग अब तुम कभी ,चलो कर लेतें है वादा यही 

लेकर सहारा तेरा, प्यार जबसे मिल गया तेरा 

अब ना और कोई बाकी चाहत है 

बस साथ एक तेरा काफी है 





 

एक टिप्पणी भेजें

0टिप्पणियाँ

एक टिप्पणी भेजें (0)