कुछ कहना है तुमसे ऐ ज़िन्दगी

Law life aur multigyan
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Poetry 


कुछ कहना है तुमसे ऐ ज़िन्दगी 

क्या तुझे सुननें में दिलचस्पी है

हो इजाज़त अगर तो तुझे जी लूं पल भर मैं 

क्या तुझे मुझे वक़्त देने में दिलचस्पी है 

गुज़र गया एक अरसा लम्बा

कभी तेरा मेरा मिलना हुआ नहीं 

तुझसे मिल कर कुछ पर सुकून गुज़ारने हैं मुझे 

क्या तुझे मुझे कुछ सुकून के पल देने में दिलचस्पी है 

रस्ते में मुसाफ़िर मुसाफ़िर से मिल जातें हैं

पर पल भर में वो याद बन जातें हैं

ना हूँ मैं मुसाफ़िर तेरे लिए, ना मुसाफ़िर है तू मेरे लिए 

चल ना एक रस्ते पर चल कर हम हमसफ़र बन जातें हैं 

क्या तुझे मेरा हमसफ़र बननें में दिलचस्पी है 

मैं होना चाहता हूँ तेरा ऐ ज़िन्दगी 

क्या तुझे मेरा होने में दिलचस्पी है 

कुछ कहना है तुमसे ऐ ज़िन्दगी 

क्या तुझे सुननें में दिलचस्पी है 




 

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