Poetry
पल भर के लिए रुक जाते तुम
यूं अकेले राहों में छोड़ के ना जाते तुम
तुम्हें चाहनें वाले होगे बहुत से
हमें चाहने वाले बस एक बन जाते तुम
काफ़ी होगा अगर तुम वक़्त दे सकोगे
हम करतें हैं मुहब्बत तुमसे, क्या तुम भी हमसे मुहब्बत कर सकोगे
जमाने कदरदार तुम्हारे लाखों हैं
क्या हमें तुम मुहब्बत की कदर दे सकोगे
तुम्हें तो आदत होगी सजी महफिलों की
अपनी महफ़िल की ज़रा सी रोशनी हमें दे सकोगे


