ग़ुम हो गयें हम खुद के हर पल से

Law life aur multigyan
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ग़ुम हो गयें हम खुद के हर पल से

खुद को अरसे से सम्भाल के रखा था 

ज़िन्दगी मे देकर पनाह खुदको , खुद से बचा कर रखा था 

मीठी सी यादें थी, कुछ खामोश से पल 

हर बात को मैने दिल में सजा कर रखा था 

इस गुमनाम से पल में अब गुमनाम हूँ मैं 

कभी थी मेरी पहचान, अब बिन पहचान हूँ मैं 

कभी थी जान मुझमे, अब बेजान हूँ मैं 

क्या जानूं मैं किसी और को, खुद से ही अंजान हूँ मैं 

मेरा यूँ खो जाना ख़ता थी मेरी 

 या किसी गलती के लिए सज़ा थी मेरी 

किसी पल की तलाश में हम गुम हो गयें

अपनी ही गुमनामी पर बेचैन हो गयें 




 

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