मेरे पिघले से ख़्वाब

Law life aur multigyan
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Poetry 


मेरे पिघले से ख़्वाब 

ना बन सकें मेरी आँखों की चमक 

ना बन सकें मेरी तक़दीर का हिस्सा 

ये बनकर रह गयें बस एक अनकहा सा किस्सा 

जो वजह थें कभी खुशियों की मेरी

अब मेरे दर्द की ज़ुबां बन गयें

रोक लेते हम खुद को ख्वाबों के जहां में जाने 

बच जाते टूटनें से इसी बहाने से 

मेरे ख़्वाब मेरे दर्द की वजह बन गयें

जो आँखों देता जाये जलन ऐसे तेज़ाब बन गयें 

मेरे ख़्वाब मेरी आँखों की ख़ता बन गयें

जो देते थें खुशी हर पल में 

वो हर पल की सज़ा बन गयें 



 

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