Poetry
बेख़बर से इस दिल में बस ख़याल तेरा है
इस ज़ुबां पर बस ज़िक्र तेरा है
हम मान लेते तुम्हें हमसे मुहब्बत नहीं
पर तेरी आँखों में देखा मैनें बस ज़िक्र मेरा है
तेरे बगैर ज़िन्दगी लगती नहीं ज़िन्दगी सी
तेरा होना ज़िन्दगी को वजह दे जाता है
सांस जब भी लेते हैं हम बस दिल में तू ही भर जाता है
बेवजह ही तो ऐसा होता नहीं
मुहब्बत किसी से भी हो जाये ऐसा होता नहीं
हम रहतें जब अपनें खयालों में तब भी तेरा ख़याल आता है
हमें जीने की वजह देकर हर बार तू दिल में बस जाता है
कोई आदत अब क्या लगे इस दिल को बस खुमार तेरा है
क्या कुछ अलग कहे ये ज़ुबा इस पर बस ज़िक्र तेरा है


