Poetry
हम हर पल तुम्हारा रस्ता देखा करतें हैं
कभी हमारी यादों की राहों से ही गुज़रा तो करो
हर बार हम अपनी चाहत बताते हैं तुम्हें
कभी तो अपनी चाहत का इज़हार तो किया करो
इस ज़माने लेना भी क्या, हमें तो बस तेरा साथ चाहिए
गुज़ार सकें हज़ारों लम्हें तेरे साथ, बस ऐसी ज़िन्दगी चाहिए
तुझे आदत है सितम करनें की
पर हमें तेरा सितम मंज़ूर नहीं
तू ना हो जिस ज़िन्दगी का हिस्सा, वो ज़िन्दगी ज़िन्दगी सी नहीं
हम तो करतें हैं पूरी कोशिश, कभी तुम भी कोशिश किया करो
जीतें हैं तेरी मुहब्बत का छाँव के सहारे
बस अपनी छाँव हम पर बरसाया करो
रखतें हैं नज़रे बिछाये तेरी राहों में
उन राहों से कभी तो गुज़रा करो


