वो लम्हा भले ही गुज़र गया

Law life aur multigyan
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Poetry 


वो लम्हा भले ही गुज़र गया 

पर यादें आज भी साथ में चलतीं हैं

एक दिन तुम आओगे राहों में 

तेरी यादें हर रोज़ मुझसे ये कहतीं हैं

कभी तुम भी मुलाकात की कोशिश करना 

मुहब्बत की उन्हीं राहों पर लौट आने की कोशिश करना 

 हम तो हर रोज़ मिलनें की कोशिश करतें हैं तुमसे 

ज़रा तुम भी इस अधूरी मुहब्बत को पुरा करनें की साज़िश करना

हम रोज़ गुज़रतें हैं तेरी गलियों से 

कभी तुम बस अपनी एक झलक देने की कोशिश करना 

करना इबादत तुम भी, हम भी खुदा से दुआ करेंगे 

आज जो रस्तें हो गयें हैं अलग हमारे 

आगे चलकर वो एक ज़रुर होंगे 

 


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