Poetry
ये नैना सिमट गयें तेरा रस्ता निहार कर
हम तो हार एक बेदर्द पर दिल हार कर
पल भर के लिए ही सही पर खबर ना ली
हम तो थक से गयें तेरी राहों पे आकर
फिर भी ख़्वाहिश तू ही है हमारी
तू आजा लौट के है बस दुआ ये हमारी
तेरे बिन इन आँखों से सावन बरसा
हर वक़्त अश्क बहा कर अब हैं ये हारीं
तू जो गया तो ले गया मुस्कुराने की वजह
क्या हो गई गलती जिसकी दी है ऐसी सज़ा
हम तो आगे बढ़ ही चुकें हैं हर दहलीज़ को पार कर
अब तू भी ज़रा इस दूरी की दहलीज़ को पार कर


