Poetry
आसमान से टूट कर गिरा ज़मीन पर सितारा
गिर कर चकनाचूर हो गया
बिखर गया दूर कोने कोने तक जाकर
खुद के ही हिस्से से दूर हो गया
उसकी चकम थी कईयों की ख़ुशी की वजह
पर वो अपनी चमक से भी जुदा हो गया
खुद की चमक से जो देता था रौशन सबको
अब खुद ही अंधेरों में गुमनाम है
जिसने की जाने कितनों की गलियां रौशन
अब खुद की गलियों से अंजान है
अब ना कोई है तारीफ़ उसकी
ना कोई उसके नाम को पहचानता है
जिसकी खुद की ही परछांई साथ ना दे
उसे भला कौन अपनाता है


