Poetry
तू भी करना ज़रा दुआ अपनें ख़ुदा से
मैं तेरा हूँ और तेरा ही रहूँ
जीत जांऊ भले मैं सारे ज़मानें से पर तुझसे मैं हारा रहूँ
है ये मेरी सच्ची मुहब्बत, ना मेरी इसमें कोई साज़िश है
तू भी जानता है मुझे, तू मेरे हर पहलू से वाकिफ है
जब भी देखा दिल ने अपनी आँखों से
पाया तुझे अपनें करीब
अब तो तू इस दिल की आदत है
जो तू करले परवाह मेरी, मुझे इस ज़मानें की परवाह नहीं
मुझे इस ज़माने की मग़रुरी की आदत है
मैं रहूँ बस तेरे इंतज़ार में, हर पल डूबा रहूँ तेरे प्यार में
तू भी करना दुआ अपनें खुदा से
मैं रहूँ बस तेरे प्यार में ये उम्र भी गुज़र जाये तेरे प्यार में


