जो तू नहीं है तो मैं भी हूँ कहाँ

Law life aur multigyan
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Poetry 



जो तू नहीं है तो मैं भी हूँ कहाँ

तू है जहाँ मुझे बस रहना है वहाँ 

तेरे पास होना ही मेरे लिए एक मुकम्मल वजह है 

तुझसे अलग मेरा बेजान जहां है

 अगर तुझसे मिले मुझे तुझपर ज़रा सा हक 

तो हो जाये अमीर मेरी भी क़िस्मत 

तुझसे अलग होकर मेरे होने की वजह नहीं मिलती 

तेरी ही वजह से मेरी ये ज़िन्दगी है सांस लेती 

मैनें तय किया है मुहब्बत का रस्ता अकेले 

पर मंज़िल तक मुझे अकेले जाना नहीं 

तू है तो है जहां में ठिकाना मेरा 

तुझसे अलग मेरा कोई ठिकाना नहीं 



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