Poetry
वो बिछड़ गयें कहीं राहों में ,हमें ख़बर तक ना लगी
हमनें देखना चाहा उन्हें अपनें ख्वाबों में
पर उस रात पल भर के लिए भी हमारी आँख ना लगी
उनका मिलना लगा जैसे ज़िन्दगी मिल गई
सूखी सी डाली पर जैसे कली सी खील गई
वो आयें तो लेकर आयें थें खुशियों की बारात
पर जाते हुये दे गयें आँखों में आंसुओं की बरसात
हमें क्या मालुम था ये खुशियां चंद पलों की हैं
ये आँखों की चमक बस चंद पलों की हैं
वो छोड़ गयें हमारा दामन कब, हमें ख़बर ना लगी
पर उनके दिये इस घाव से, हमें चोट बड़ी गहरी लगी
वो बिछड़ गयें कहीं राहों में, हमें ख़बर तक ना लगी
पर उस रात पल भर के लिए भी हमारी आँख ना लगी


