Poetry
फिर आयी उसकी याद
संग अपने ले आयी आंसुओ की बरसात
दिल डूब गया उसकी हर बात की याद में
फिर रहा ना चैन कहीं भी, हम ही बह से गयें अपने ही आंसुओ की बरसात में
हमनें देखा चारो ओर फैला था तन्हाई का शोर
हमनें चाहा अपनी तन्हाई से दूर जाना
पर कर ना पायें हम कोई बहाना
जाने कहाँ से आकर ये तन्हाई मुझे छेड़ जाती है
दिल लगता है जब तड़पने तो ये अकेला छोड़ जाती है
हम भी खुद को रोक पातें नहीं
अक्सर डूब ही जातें हैं उसकी यादों में
उसकी यादें आकर मेरी रुह में बस जातीं हैं
जब हो जाती है हमें आदत उनकी, तब वो अकेला मुझे छोड़ जाती हैं


