Poetry
इन सुनसान सी राहों में
कल चमकती किस्मत का शोर होगा
ना होगा अंधेरा फिर कभी
एक अनन्त सा भोर होगा
सालों से मुरझायें चहेरे पर, फिर से हँसी का पैग़ाम होगा
आज हर ओर मायूसी का पहरा है
अपनी पहचान से बिछड़ा हर चेहरा है
कल फिर अपनी पहचान से रुबरु होगा
फिर से ज़िंदगी को जीनें का जुनून होगा
हर ओर फिर से खुद की रौशनी की चमक होगी
ज़िन्दगी में फिर से खुद की महक होगी
आज जो ओझल सा सूरज है
कल फिर से उसका उजाला होगा
किस्मत फिर से चमकेगी
फिर से हर ओर चमकती किस्मत का शोर होगा


