तेरी नज़रों में मेरे वजूद को

Law life aur multigyan
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Poetry 


तेरी नज़रों में मेरे वजूद को पनाह मिल जाये 

हो जाये तेरी मर्ज़ी तो मुझे भी जीने की वजह मिल जाये 

समझ लो तुम बिन कहे, हमें कहना आता नहीं  

 कब तक खुद को रखें दूर तुमसे, ये दिल अब और दूरी चाहता नहीं 

तू जो बढ़ने दे अपनी ओर मुझे 

मुझे चलने का बहाना मिल जाये 

ना कह पाओ तुम अगर तो

बस तेरा एक इशारा मिल जाये 

तुझ तक आकर हम अपनी मंज़िल को पा लेंगे 

मुहब्बत के कुछ पल हम भी गुज़ार लेंगे 

तू कर दे रहम जो, तो मुझे भी सहारा मिल जाये 

मिल जाये तेरा सहारा तो मुझे भी जीने का बहाना मिल जाये 




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