Poetry
जिस पल में रहो तुम मेरे साथ
वो पल ज़िन्दगी भर यूँ ही ठहर जाये
ना दे सके जो पल साथ ज़िन्दगी भर मेरा
तो ज़िन्दगी बस उस पल में ही सिमट जाये
एहसान हो तेरा, तेरे दिल में भी कोई ऐसी ख़्वाहिश जग जाये
हो जाऊँ अगर मैं खुद से भी दूर
फिर भी तू दूर मुझसे ना जाये
हर बार तू ज़िन्दगी का बहाना बन जाये
जो नज़रो को उठाऊ कभी तो तेरा ही चेहरा नज़र आए
जो बन्द हो आँखे कभी मेरी तो तेरी ही झलक बस ये पायें


