एक वजह बेवजह सी

Law life aur multigyan
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Poetry 


एक वजह बेवजह सी जिंदगी के लिए काफी है

फिर दूसरी वजह की तलाश क्या करें 

हमें जब मिल जाती है रौनक खुद के वजूद से

फिर ज़माने की रौनक की तलाश क्या करें 

खो भी जायें जो इस ज़मानें में 

ढूंढ लेंगे खुद को खुद के उजालों से 

फिर किसी और के उजालों का इंतज़ार क्या करें 

ज़माना चाहे हो बेपरवाह हमारे लिए 

हम उसकी बेपरवाही की परवाह क्या करें 

 जिस ज़माने को हमनें सजाया है अपनी रंगत से

जो हमसे रंगों को उधार लेकर रंगीन हो गया 

हम खुद ही रंगत के जादुई चिराग हैं

अब इस ज़माने में रंगों की तलाश क्या करें 



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