चलो इस बार नहीं तो अगली बार

Law life aur multigyan
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Poetry 

चलो इस बार नहीं तो अगली बार सही

कभी हमारी भी मुहब्बत मुकम्मल ज़रूर होगी 

ना हो सकी मुलाकात इस बार 

पर अगली बार ज़रुर होगी 

तब हम बाट लेंगे अपने दर्द 

बरसों से रुकी आँसूओं की बरसात ज़रुर होगी 

बिछड़ गयें हैं हम इन रस्तों में कहीं

पर इन रस्तों में फिर मुलाकात ज़रुर होगी 

कुछ इंतज़ार के पल गुज़ार लेतें हैं हम 

तुम भी कुछ इंतज़ार के पल बिता लेना 

रखना यक़ीन हमारी किस्मत पर 

हमारी मुहब्बत मुकम्मल ज़रूर होगी 



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