ये शाम खूबसूरत सी

Law life aur multigyan
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Poetry 


ये शाम खूबसूरत सी, जो हर रोज़ मुझे मुझसे मिलाती है

हर रोज़ दिल को छू कर जाती है 

दोपहरी के छाँव तले, हर रोज़ दबे पाँव आती है 

ये शाम खूबसूरत सी, हर रोज़ मुझे मुझसे मिलाती है

मिट जाती है सारी थकान,इसके आने से

ये हर रोज़ खुशी की वजह देकर जाती है 

फिर दिन भर के शिकवे गिले की वजह को समेट संग अपने ले जाती है 

मैं उदास या रहूँ फिक्रमंद, ये हर फिक्र को बेवजह कर जाती है 

दिन भर की थकान को अपनी ठंढक से यूं ही खतम कर जाती है 

ये शाम खूबसूरत सी जो हर रोज़ मुझे मुझसे मिलती है 




  

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