Poetry
ये वक़्त भी गुज़र जायेगा
किसी पल में गुज़रा कल बन जायेगा
जो हुआ नहीं उसकी खैर क्या करें
जो हो गया वो अपना नसीब बन जायेगा
यहाँ हर रोज़ नई उम्मीदें हैं
कुछ उम्मीदों पर अधूरे पन के छींटे हैं
आज जो है क्या वो कल तक साथ निभायेगा
या नया वक़्त किसी और को अपने साथ में ले कर आयेगा
वक़्त के संग कुछ बिखर जायेगा, तो कुछ संवर जायेगा
आज जो दौर है वो भी गुज़र जायेगा
ये पल गुज़र कर फिर दुबारा ना आयेगा
जो आज है वो कल ना होगा
जो कल होगा वो आज ना होगा
फिर जी लेतें हैं इस पल में जी भर के
छोड़कर ये फिकर की कल क्या होगा


