Poetry
ना रोके रुके आज आँखों के अश्क
मैनें भी इन्हें बहता छोड़ दिया
था इरादा खुद को ना कमज़ोर करनें का
आज वो भी इरादा तोड़ दिया
ज़रा बह जाने दो अश्कों को
ज़रा हो जाने दो खुद को खुद के जैसा
मेरे दिल से आवाज़ आयी वो भी कहने लगा कुछ ऐसा
मैनें खुद की खींची लकीरों को तोड़ दिया
मैनें अश्कों को बहता छोड़ दिया
दिल पर अब कोई बोझ नहीं
अब खुद पर कोई अफसोस नहीं
मैनें खुद को आज़ाद बहता छोड़ दिया
मैनें अश्कों को बहता छोड़ दिया


