Poetry
चलो तेरी दी बदनामी ही सही
इस मुहब्बत में तूने भी अपना हिस्सा दे दिया
थे अपनी पहचान से इस जहां में मशहूर हम
तूने बदनामी का तोहफ़ा दे दिया
पर तेरी दी हर चीज़ बेशकीमती है हमारे लिए
हमें क़बूल है तेरी दी हर बदनामी
तेरी दी हर बदनामी हमें सौगात सी लगती है
हम चाह कर भी ना जान पातें की तेरे दिल में क्या है
तेरी दी सौगात ने हमें तेरे दिल का हाल समझा दिया
हम अकेले ही कैसे निभाते इस मुहब्बत को
शुक्रिया तेरा तूने मुहब्बत में अपना हिस्सा दे ही दिया


