जबसे देखा उन्हें, कुछ और देखनें की ख़्वाहिश नहीं

Law life aur multigyan
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Poetry 


जबसे देखा उन्हें, कुछ और देखनें की ख़्वाहिश नहीं 

वो ही रहतें हैं हमारे हर रोम में 

हम खुद ही खुद में बाकी नहीं 

क्या वजह चाहें कोई और हम, दूसरी वजह की ज़रूरत नहीं 

वजह जो हैं बस वो हैं हमारी, हमें दूसरी वजह की ख़्वाहिश नहीं 

उनकी मुहब्बत में डूब कर हम समन्दर की गहराई भी पार कर गयें 

मुहब्बत का आलम ऐसा हुआ की हम खुद को हार गयें 

वो जीत गयें हमसे, हम उनसे हार गयें 

 हम हो जायें पूरी तरह उनकी बस इतनी सी ख़्वाहिश है 

दिल की ख़्वाहिश करलें हम भी पूरी ज़रा, बस हमारी इतनी सी साज़िश है 




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