Poetry
ऐ वक़्त मुझसे ज़रा देर हो गयी, क्या तू रुकेगा मेरे लिए
मैनें बूना ज़िंदगी का ताना बाता पर वो ना रुकी मेरे लिए
तू अगर ज़रा रुक जायेगा, मुझे भी रुतबा मिल जायेगा
ये दुनिया किसी आम को जीने नहीं देती
जो कोई कर भी ले हिम्मत उसे उठनें नहीं देती
सुना है तेरे बदलते ही बदल जाता है रवैया इस दुनिया का
तू पल भर के लिए ठहरकर मेरे लिए बदलता क्यों नहीं


