Poetry
वो भी क्या गज़ब कर गयें
देख कर बस एक दफा हमारी ओर, अपनें साथ हमारा चैन ले गयें
हम चाह कर भी उन्हें रोक ना सकें
जाना चाहा उनकी राहों पर लेकिन हम जा ना सकें
बड़ी उम्मीद लगाकर हम देखा करतें हैं उनके आने का रस्ता
हम
पर वो वक़्त के साथ हमसे दूर जानें लगें
आकर यूं फिर से जाना ठीक नहीं
हम ना भी कहें कुछ पर इस दिल पर ज़ोर नहीं
वो हमें लेकर आयें अपने मुहब्बत के जहां में
दिखा कर हमें सितरों से भरी रात के ख़्वाब
हमें जाने किस तपते रेगिस्तान में अकेला छोड़ गयें


