चलो आज नहीं तो ना सही

Law life aur multigyan
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Poetry 


चलो आज नहीं तो ना सही, कल अपना मिलना ज़रुर होगा 

अगर मिल ना सकें कल भी, अगले जनम में मिलना होगा 

सुना है इंतज़ार खाली जाता नहीं 

जो आ जाये वक़्त अपनें मिलनें का तो बिन मेल कराये वो जाता नहीं 

अभी इंतज़ार की घड़ियाँ बाकी है

इस बेवक्त से वक़्त का गुज़रना बाकी है

कई अरसें गुज़ारे इंतज़ार में, बस चंद पलों का गुज़रना बाकी

हमें पार निकलर इस वक़्त से दूर अपनें वक़्त में जाना है 

तुम भी ज़रा रहना तैयार ,हमें आगे अपने वक़्त तक जाना है 

जिस चाहत के सहारे हम कर रहें हैं इंतज़ार 

आगे उस चाहत को भी निभाना है 



 



 

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