Poetry
यूं दूर से ही लौट जाने वाले कभी सामने आकर हमसे मिला कर
कुछ बातें हो जायेंगी हम दोनो की, तू ऐसे मिला कर
कब तक करोगे मुहब्बत में लुका छिपी तुम
अपनें सितारों के जहाँ से कभी ज़मी पर आओ तुम
इसी बहाने ज़रा तुमसे मिलना हो जायेगा
जो बंधा है आंसू आँखों वो खुद ही बह जायेगा
मुझे फिकर नहीं ज़माने की
बस ज़रूरत तुम्हारी है
चलें हम सालों अलग रस्तों पर
अब संग चलने की बारी है
है तुम्हें भी कसम इस मुहब्बत की, अब ना अपनी राहें बदलना तुम
अगर तुम आगये साथ निभाने को,हर कदम साथ निभाना तुम


